

मुंबई पर हमले को २ माह बाद एक साल पूरा हो जाएगा, लेकिन भारत अभी भी 'अंकल अमेरिका' की पूँछ पकड़ कर उस हमले में पाकिस्तानियों के शामिल होने के सबूत पकिस्तान को दे रहा है, पर पकिस्तान है की कभी कहता है 'चीनी कम है', तो कभी 'दूध कम' होने की शिकायत कर रहा है , कभी-कभी तो ऐसा लगता है, जैसे हमला हमारे यहाँ नही उनके यहाँ हुआ है और उसमें हमारा हाथ है,सरकार का कहना है हम चाहते हैं पकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाया जाय , कोई मुझे ये बताये की ये भला कैसी कूटनीति है जिसमें पीड़ित को ही मुजरिम सा बना दिया है|
मुझे एक बात अभी तक समझ नही आई, हम कब तक अमेरिका की ऊँगली पकड़ कर चलते रहेंगे, पत्रिका में बड़े ही शानदार ढंग से इस बात को एक कार्टून के जरिये दर्शाया था, जिसमे भारत, अमेरिका के सामने अंकल-अंकल कह कर रो रहा है, इसमें ग़लत ही क्या था ,धरातल पर सच्चाई भी तो यही है,
अब बात कसाब की, ये देश का सबसे वीवीआईपी हो गया, महाशय को मुंबई हमले के दौरान , मौक़ा-ऐ-वारदात से पकड़ा गया है लेकिन सज़ा पाने के लिए आजतक तड़प रहा है,वो अदालत में भी अपील कर चुका है की मुझे फांसी देदो। लेकिन हमने तो कसम खाई है जब तक उस पर होने वाला खर्चा अरबों में न पहुँच जाए तब तक इसको सजा नही देंगे,अरे मै तो बताना ही भूल गया की कसाब पर लगभग ११००० पन्नों का आरोप-पत्र भी तो तैयार किया है, वो भी तो पड़ना और पढाया जाना बाकी है,
हाफिज़ सईद को रिहा कर, पाक बता ही चुका है की वो किस ढंग से काम कर रहा है, और रही बची कसर वो बार-बार भारत से भेजे गए सबूतों में नुस्ख निकाल कर बता रहा है,
हमले के दिन से आजतक रोजाना , सुबह टेलीविजन ऑन करते ही भारत के किसी न किसी मंत्री का बयान पड़ने को मिल ही जाता है, जिसमे पकिस्तान को आगाह किया जाता है, की हमारे सब्र का इम्तिहान न लिया जाय,
एक बात तो पक्की है की बयानबाजी और भाषण मै हमें कोई नही हरा सकता, हाँ उसके अमल होने की बात मत पूछिए, न जाने कब इनकी कथनी और करनी मिलेगी!!
यूँ तो हमें किसी चीज़ का सब्र नही होता, पता नही यहाँ पर इतना सब्र कैसे कर पा रहे हैं , मुझे तो लगता है इतना सब्र न किया जाय और जल्दी कुछ ऐसा एक्शन लिया जाय जो एक आम आदमी की समझ में भी आ जाए , वरना ये कूटनीति जैसा शब्द, पता नही कब से उन्हें परेशान किए जा रहा है,
अरे जागो इंडिया जागो, ..................... बातें कम काम जादा

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