
एक बार फिर ऐसे विषय पर लिख रहा हूँ जिसे 'हार्ड-न्यूज़' की श्रेणी में नहीं रखा गया है, ये पत्रकारिता की शैली है, जो ख़बरों को प्रकृति के आधार पर विभक्त करती है | अब मुख्य बात , पिछले कुछ दिनों से 'तमाशाई क्रिकेट' , जिसे आप लोग आई.पी.एल. के नाम से जानते हैं, उसमें कुछ ऐसी उथल-पुथल चल रही हैं की, संसद तक में हंगामा हैं, अब बात संसद तक पहुँच गयी है तो, मुद्दे में भी कोई बात होगी, यही खोजते हुए कुछ दिलचस्प बातें सामने आयीं| पहले तो धन्य हो बी.सी.सी.आई. जो ४ साल की कुम्भकर्णी नीन्द के बाद जागी और उससे भी धन्य हमारी सरकार, जिसकी नाक के ठीक नीचे इतना बड़ा घोटाला चल रहा था जो उसे ही चूना लगा रहा था | क्रिकेट की क्रांति की संज्ञा पा चुका आई.पी.एल. पिछले ३ साल से चल रहा है, ललित मोदी के सानिध्य में इस लीग ने पूरे क्रिकेट-जगत में छाप छोड़ी , लेकिन इस चकाचौंध में कुछ ऐसा गोरखधंधा चल रहा है, किसी को भी मालूम न था | कहीं पर पैंसों का घपला तो कहीं टैक्स चोरी की शिकायतें , आजकल यह कुछ इन्ही वजह से सुर्ख़ियों में है | मोदी की महत्वाकांक्षी सोच का नतीजा आई.पी.एल. आज उन्ही की गलत व्यवस्थता के कारण संकट में है आखिर ये बात सामने कैसे आई, ये भी बड़ा दिलचस्प वाकया है, दरअसल लीग के अगले सत्र के लिए दो नयी टीमों , कोच्ची और पुणे का एलान किया गया, जिसमें कोच्ची टीम के खरीददारों की सूची सुनंदा नाम की महिला का नाम आया, जिन्हें कथित तौर पर केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर की महिला-मित्र बताया गया और कहा गया की सुनंदा ने थरूर की ओर से बोली लगायी, अब यहाँ से शुरू हुआ विवाद पहले तो थरूर को ले उड़ा, जिन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा,और अब इसने ललित मोदी को अपना शिकार बनाया | कहा जा रहा है की इसमें इतना गड़बड़झाला है जिसे सुलझाने में समय लगेगा | इसकी जांच में पूरा आयकर विभाग लग गया है, जब से जांच शुरू हुई है, दिन-ब-दिन नई-नई परतें खुलती जा रही हैं, कभी टीमों की बोली की प्रक्रिया पर सवाल उठाये जा रहे हैं तो कभी इसमें हो रहे खर्चो की पूरी जानकारी संदेह के घेरे में आ रही है | जो विवाद खुद मोदी के ही बयां से शुरू हुआ था आज वही ललित मोदी के आई.पी.एल. आयुक्त के पद से निष्काशन का कारन भी बन गया, न मोदी थरूर को लेकर बयां देते और न ही उलटे लपेटे में आते | शायद मोदी की ही वजह से इन घोटालों पर जांच का ख्याल सरकार के भी दिमाग में आया, लेकिन मुझे एक बात अभी तक समझ नहीं आई की क्या ये सब अकेले मोदी का ही किया धरा है, या फिर उन्हें सिर्फ बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जो भी हो लेकिन शक के घेरे में तो बी.सी.सी.आई. के और भी अधिकारी आने चाहिए थे, एक अकेला आदमी इतने बड़े उलटफेर कर रहा है और किसी को कानोंकान खबर तक नहीं, पचा पाना जरा मुश्किल है | बातें तो कई निकल कर आ रही हैं , जो कहती हैं राजस्थान रोयल्स पर शिल्पा शेट्ठी का कोई मालिकाना हक नहीं है और इसमें मोदी के ही कुछ रिश्तेदारों ने निवेश किया है, लेकिन ये बात ३ साल बाद सामने आई है और वो भी तब जब सारी उंगलियाँ मोदी के ही खिलाफ हैं |पूरे विवाद में मोदी एक अकेला शक्स दिख रहा है जिसने सारे बुरे काम किया हैं बाकी तो दरोगा की तरह खड़े हैं और खुद को पाक-साफ़ बता रहे हैं | मुद्दे में बढती गर्मी के चलते मोदी को तो आखरी गेंद पर आउट कर चिरायु अमीन को क्रीज़ पर उतार दिया गया है, शायद ये इस गर्मी में कुछ राहत दे लेकिन सवाल तो अभी भी बाकि हैं क्या सिर्फ मोदी ?






