Thursday, September 10, 2009

जिन्ना का जिन्न ले उड़ा जसवंत को


मोह्ह्म्मद अली जिन्ना, ये चीज़ क्या रह होंगे, क्योंकि इनका नाम लेना ही जुर्म हो गया, भाजपा में तो कुछ ऐसा ही है,जब देखो इनके नाम पर बवाल खड़ा हो जाता है, ताज़ा मामला जसवंत सिंह की किताब से जुड़ा हुआ है, जो जिन्ना को केन्द्र में रख कर लिखी गई है|
आपकी जानकारी के लिए बतादें मुहम्मद अली जिन्ना ब्रिटिश भारत के प्रमुख नेता और मुस्लिम लीग के अध्यक्ष थे जिनके प्रयास से भारत का विभाजन हुआ और पकिस्तान की स्थापना हुई। पाकिस्तान में इन्हे क़ैद-ए-आज़म (महान नेता) और बाबा-ए-क़ौम (राष्ट्रपिता) कहा जाता है। इनकी जयंती और निधन के दिन पाकिस्तान में सरकारी छुट्टी होती है।
अब आपकी समझ में आ गया होगा की क्यों जिन्ना के नाम यहाँ उथल-पुथल हो जाती है, भारत में जिन्ना को भारत-विभाजन का मुख्य सूत्रधार समझा जाता है,
जसवंत सिंह की नव-प्रकाशित पुस्तक 'जिन्ना; भारत विभाजन के आईने में' इस बार इस बोतलबंद जिन्न को बाहर निकाल लायी, और यही जिन्न उनका पार्टी से निष्कासन का कारण बना, दरअसल पार्टी का कहना है की , पुस्तक में सरदार पटेल पर कुछ आप्पत्तिजनक आरोप लगायें गए हैं, हालांकि जसवंत सिंह ने ऐसी किसी बात के होने से साफ़ इनकार कर दिया है,जबकि कुछ इसको संघ(राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) का दबाव बताते हैं, आख़िर पार्टी की डोर उनके ही हाथों में ही तो है,
जसवंत सिंह का कहना है की किताब को बिना पड़े ही भारतीय जनता पार्टी ने उन पर इतना निर्णय लिया, गौरतलब है की जसवंत सिंह पिछले ३० सालों से पार्टी के वफादार थे, जिनको निकलने में पार्टी को ३० मिनट भी नही लगे,
कुछ साल पहले लालकृष्ण आडवानी भी जिन्नाह को धर्मनिरपेक्ष कहने के चक्कर में पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी गवां चुके हैं, लेकिन उस वक्त जिन्ना की तारीफ करने वाले आडवानी भी निशब्द हैं, कारण वो ही जानें |
सिंह को पार्टी से निकालन पार्टी ने अनुशासहीनता पर कार्यवाही कही, अगर ये अनुशासहीनत है तो फ़िर जो भाषाअरुण शौरी ने पार्टी के बड़े नेताओं के ख़िलाफ़ प्रयोग की, वो क्या है!!!!!!!!!!!!!!!!!!

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