
अगर आप मुझे इंडियन आइडल बनाना चाहते हैं तो वोट करें, अरे चोंकिये नही , में इंडियन आइडल में नही जा रहा हूँ और शायद ही जा पाऊं , कारण रहने दीजिये दरअसल आज कुछ बातें टेलीविजन पर रोजाना दिखने वाले रियलिटी शो की हो जाए, पिछले कुछ सालों में इनकी ऐसी बाढ आई की हर कोई इसमें बहता चला जा रहा है
जो आज मैं लिखने जा रहा हूँ , उसे लिखने का विचार कुछ समय तक मेरे मन में तक न भटका था, लेकिन क्या करुँ , मैं ख़ुद को न रोक पाया,मुद्दा ही ऐसा है, कुछ समय तक टीवी पर देखी गायकों की खोज , फ़िर वक्त आया, डांसर खोजने का, किंतु आज तो जीवनसाथी भी आपको टीवी पर मिल जायेंगे, हाँ ये जनता पर निर्भर करता है की वो किसे वोट देकर आपके गले बांधें , सुनने में कुछ अटपटा जरूर लगता है लेकिन ऐसा ही कुछ तो हो रहा है आजकल टीवी पर कभी आपको सच बोलने पर रुपए दिए जाते हैं, हाँ ये सच जरा कुछ हटके होते हैं , तो कभी मासूम बच्चों को छोड़ दिया जाता है, कुछ हस्तियों के हवाले जो उनके माँ -पिता बनकर उन्हें पालेंगे, कौन अच्छा माँ -पिता बन सकता है ये भी रियलिटी शो का हिस्सा बन चुका है अब आप ही सोचिये किस विषय पर और एक रियलिटी शो बन सकता है!!!!
आज के इस रियलिटी के बाज़ार में हमारे मूल कुछ इस कदर खोते जा रहे हैं की कभी-कभी तो चिंता होने लगती है की ये हम कहाँ जा रहे हैं जब कोई इस पर आवाज़ उठाये तो इसे "मानसिक संकीर्णता" कहा जाता है, जबकि इसे बनानेवालों , और देखने वालों , दोनों को ही मालूम है की कुछ तो गलत है आखिर इस तरह के कार्यकर्मों को फलने-फूलने किसने दिया, हमने ही तो राखी की शादी पर तालियाँ बजाई, वो हम ही थे जो "बिग बॉस" के घर पर नज़र रखे हुए थे इन्हें बनाना और दिखाना भी सही है किन्तु कुछ तो सीमाएं हों, किन विषयों पर बनायें किन पर नहीं
इन शो पर जिस तरह की भाषा प्रयोग की जाती है, वो आपको इन शो के दौरान सुनाई देने वाली 'बीप' से ही आ चल जाता होगा कुछ इसे आधुनिकता का नाम देते हैं, भाईसाहब ये किस तरह की रियलिटी है, जहाँ महिलाओं के जिस्म की अवांछित नुमाइश होती है और भद्र भाषा का इस्तेमाल होता है कुछ का कहना है की इन शो ने अमेरिका , इंग्लॅण्ड में बहुत अच्छा प्रभाव डाला है, पर ये क्यों ये भूल जाते हैं की ये इंडिया है, जहाँ की अपनी संस्कृति और सभ्यता है
जो बातें कभी परदे के पीछे या सबकी नज़रों से बचकर होते थे वो सब टीवी पर बेचीं जा रही हैं आखिर क्या हद हो इस रियलिटी की जरा सोचिये , मैं तो चला , क्या पता किसी रियलिटी शो में हिस्सा मिल जाय!!!!!!!!!!!!
जो आज मैं लिखने जा रहा हूँ , उसे लिखने का विचार कुछ समय तक मेरे मन में तक न भटका था, लेकिन क्या करुँ , मैं ख़ुद को न रोक पाया,मुद्दा ही ऐसा है, कुछ समय तक टीवी पर देखी गायकों की खोज , फ़िर वक्त आया, डांसर खोजने का, किंतु आज तो जीवनसाथी भी आपको टीवी पर मिल जायेंगे, हाँ ये जनता पर निर्भर करता है की वो किसे वोट देकर आपके गले बांधें , सुनने में कुछ अटपटा जरूर लगता है लेकिन ऐसा ही कुछ तो हो रहा है आजकल टीवी पर कभी आपको सच बोलने पर रुपए दिए जाते हैं, हाँ ये सच जरा कुछ हटके होते हैं , तो कभी मासूम बच्चों को छोड़ दिया जाता है, कुछ हस्तियों के हवाले जो उनके माँ -पिता बनकर उन्हें पालेंगे, कौन अच्छा माँ -पिता बन सकता है ये भी रियलिटी शो का हिस्सा बन चुका है अब आप ही सोचिये किस विषय पर और एक रियलिटी शो बन सकता है!!!!
आज के इस रियलिटी के बाज़ार में हमारे मूल कुछ इस कदर खोते जा रहे हैं की कभी-कभी तो चिंता होने लगती है की ये हम कहाँ जा रहे हैं जब कोई इस पर आवाज़ उठाये तो इसे "मानसिक संकीर्णता" कहा जाता है, जबकि इसे बनानेवालों , और देखने वालों , दोनों को ही मालूम है की कुछ तो गलत है आखिर इस तरह के कार्यकर्मों को फलने-फूलने किसने दिया, हमने ही तो राखी की शादी पर तालियाँ बजाई, वो हम ही थे जो "बिग बॉस" के घर पर नज़र रखे हुए थे इन्हें बनाना और दिखाना भी सही है किन्तु कुछ तो सीमाएं हों, किन विषयों पर बनायें किन पर नहीं
इन शो पर जिस तरह की भाषा प्रयोग की जाती है, वो आपको इन शो के दौरान सुनाई देने वाली 'बीप' से ही आ चल जाता होगा कुछ इसे आधुनिकता का नाम देते हैं, भाईसाहब ये किस तरह की रियलिटी है, जहाँ महिलाओं के जिस्म की अवांछित नुमाइश होती है और भद्र भाषा का इस्तेमाल होता है कुछ का कहना है की इन शो ने अमेरिका , इंग्लॅण्ड में बहुत अच्छा प्रभाव डाला है, पर ये क्यों ये भूल जाते हैं की ये इंडिया है, जहाँ की अपनी संस्कृति और सभ्यता है
जो बातें कभी परदे के पीछे या सबकी नज़रों से बचकर होते थे वो सब टीवी पर बेचीं जा रही हैं आखिर क्या हद हो इस रियलिटी की जरा सोचिये , मैं तो चला , क्या पता किसी रियलिटी शो में हिस्सा मिल जाय!!!!!!!!!!!!




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