Thursday, April 1, 2010

भागो ! बच्चन न आ जाये


फिल्मों के खलनायक भी शायद ही कभी अमिताभ बच्चन से इतने दूर भागते दिखें हो, जितना आज देश की एक शीर्ष राजनितिक पार्टी के लोग उनसे बचते नज़र आ रहे हैं |कांग्रेस का हर कोई नेता उनसे दूर रहने की कोशिश कर रहा है, हाल ही में ये सिलसिला शुरू हुआ मुंबई में सी-लिंक के आठ लेन का बनने पर आयोजित हुए कार्यक्रम में अमिताभ के विशिष्ट अतिथि बनकर आने से, जहाँ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण भी मौजूद थे, अब न जाने क्या हुआ की कांग्रेस को अमिताभ की मौजूदगी बिलकुल रास नहीं आई, और एक विवाद शुरू हो गया | जानकार अमिताभ का गुजरात का ब्रांड-एम्बेसडर बनना और नरेन्द्र मोदी के साथ एक ही मंच पर खड़ा होना , इस भेदभाव का कारण मान रहे हैं और इसके ऊपर गाँधी-बच्चन परिवार का विवाद तो जग-जाहिर है | लेकिन जिस तरह से बार बार अमिताभ जैसी हस्ती का तिरस्कार हो रहा है, इससे उनके चाहने वाले भी आह़त है | पुणे में मराठी साहित्य मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रम के अनुसार अशोक चव्हाण और अमिताभ को एक ही मंच पर शामिल होना था लेकिन फिर खबर आई की चव्हाण अमिताभ से एक दिन पहले ही कार्यक्रम में शामिल होंगे, कभी जयराम रमेश, अमिताभ की मौजूदगी के चलते कार्क्रम में शामिल नहीं होते तो कभी दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, अमिताभ के बेटे अभिषेक बच्चन को दरकिनार कर कार्यक्रम में शामिल ही नहीं करते हैं | यह सूची दिन-ब-दिन बढती जा रही है, और अब तो दोनों और से बयानों की बौछार हो रही है, लेकिन इस विवाद का अंत कब और किस रूप में होगा, किसी को नहीं पता, आखिर कब तक कांग्रेसी बच्चन से दूर हटते रहेंगे| अमिताभ इस व्यव्हार को समझ से परे बता रहे हैं तो कांग्रेस अमिताभ का दंगों के आरोपी नरेन्द्र मोदी के साथ अमिताभ के संबंधों को कारणों की श्रृंखला में जोड़ रही है |मोदी भी अमिताभ के बचाव में कांग्रेस पर वर कर रहे हैं तो भाजपा भी इस मौके पर अपनी सियासी रोटियां सेकने का मौका नहीं गँवा रही है |यह विवाद जिस तरह से सियासी रंग में रंगता जा रहा है, कांग्रेस और भाजपा दोनों फिर आमने सामने खड़े हो गए हैं और मुख्य मुद्दों को छोड़ इस पर फंस गए है | उम्मीद तो यही है की कांग्रेसियों का अमिताभ के प्रति यह रवय्या बदले और जो वो उनसे भागते दिख रहे हैं फिर से उनके करीब आ जायें |

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