
कुछ दिनों पहले तक क्रिकेट में युवाओं को तरजीह देने की बात कही जा रही थी,कहते थे ये यंगिस्तान का समय है, उन्हें मौका दो, बुजुर्ग बहुत खेल चुके अब कुछ यही हाल राजनीति में भी चल रहा है भाजपा के तो यही हाल हैं, लगता है उनका भरोसा भी अब बुजुर्ग नेताओं से उठने लगा है,इसी का तो परिणाम है की भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में बहु-प्रतीक्षित परिवर्तन हो गया
लोक-सभा चुनावों में हार के बाद से भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाये जा रहे थे , पार्टी की धज्जियां उड़ाने से खुद पार्टी के नेता भी नहीं बच पाए, बार-बार नेतृत्व परिवर्तन की बात कह कर लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह पर उंगलियाँ उठाई जा रही थी
आखिरकार आज वो दिन भी आ गया जब मन में प्रधानमंत्री बनने का अधूरा ख्वाब लिए आडवाणी ने लोक-सभा में नेता -प्रतिपक्ष का पद भी छोड़ दिया यूँ तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है, लेकिन इस तरह जाना होगा , ये शायद किसी को गंवारा न होगा अब ये पद सुषमा स्वराज संभालेंगी , कैसे और कब तक? ये देखना दिलचस्प होगा
इस परिवर्तन के साथ एक और परिवर्तन भी पार्टी नेतृत्व में हुआ, राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के स्थान नितिन गडकरी को ये जिम्मेदारी सौंपी गयी,गडकरी महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष हैं
कुछ इसे संघ की करामात कहता है, तो कोई इसे भाजपा के उज्जवल भविष्य के लिए जरूरी कदम बताता है, जो भी हो लेकिन ये परिवर्तन कहीं न कही वक़्त भी मांग रही दूसरी पीड़ी को नेतृत्व सौंपना एक सकारात्मक कदम ही कहा जा सकता है
हालांकि आडवाणी ने अभी सक्रिय राजनीति में रहने की बात कही है, लेकिन कब तक, ये तो वही जानें , फिलहाल उन्हें भाजपा संसदीय दल का नेता नियुक्त किया गया है
उम्मीद है ये परिवर्तन भाजपा का भला ही करें
लोक-सभा चुनावों में हार के बाद से भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाये जा रहे थे , पार्टी की धज्जियां उड़ाने से खुद पार्टी के नेता भी नहीं बच पाए, बार-बार नेतृत्व परिवर्तन की बात कह कर लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह पर उंगलियाँ उठाई जा रही थी
आखिरकार आज वो दिन भी आ गया जब मन में प्रधानमंत्री बनने का अधूरा ख्वाब लिए आडवाणी ने लोक-सभा में नेता -प्रतिपक्ष का पद भी छोड़ दिया यूँ तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है, लेकिन इस तरह जाना होगा , ये शायद किसी को गंवारा न होगा अब ये पद सुषमा स्वराज संभालेंगी , कैसे और कब तक? ये देखना दिलचस्प होगा
इस परिवर्तन के साथ एक और परिवर्तन भी पार्टी नेतृत्व में हुआ, राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के स्थान नितिन गडकरी को ये जिम्मेदारी सौंपी गयी,गडकरी महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष हैं
कुछ इसे संघ की करामात कहता है, तो कोई इसे भाजपा के उज्जवल भविष्य के लिए जरूरी कदम बताता है, जो भी हो लेकिन ये परिवर्तन कहीं न कही वक़्त भी मांग रही दूसरी पीड़ी को नेतृत्व सौंपना एक सकारात्मक कदम ही कहा जा सकता है
हालांकि आडवाणी ने अभी सक्रिय राजनीति में रहने की बात कही है, लेकिन कब तक, ये तो वही जानें , फिलहाल उन्हें भाजपा संसदीय दल का नेता नियुक्त किया गया है
उम्मीद है ये परिवर्तन भाजपा का भला ही करें

सही बात है, अब राजनीति में भी बुजुर्गों को आराम
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