Friday, October 2, 2009

अगर ये 'कैटल क्लास' है तो फिर ये क्या....


बड़े किस्मत वाले होंगे वो 'मवेशी' जिनको हवाई जहाज में सफर करने को मिलता है, हम तो अपनी छत्त से देखकर ही अपना मन बहला लेते हैं लेकिन एक बार उन जानवरों को देखने की बड़ी ख्वाहिश है जो, हवाई सफर करते हैं अब तक तो आपकी समझ में भी आ गया होगा की मै किसके बारे में बात कर रहा हूँ आजकल सरकार पर बचत और खर्चा कम करने का ऐसा भूत सवार है की, कभी प्रणव दा, तो कभी सोनिया गाँधी ख़ुद हवाई जहाज की साधारण कक्षा में सफर कर रहे है कुछ ऐसी ही सलाह और मंत्रियों को भी दी गई, लेकिन ये ठहरे ५ सितारा आराम के मारे , इन्हे तो हवाई जहाज की 'इकोनोमी क्लास' , 'मवेशी-घर' नज़र आती है सरकार के नए नवेले चेहरे और केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर साहब को तो कुछ ऐसा ही लगता है

पहली बार सांसद बने थरूर साहब , इससे पहले '५ सितारा' विवाद के कारन चर्चा में आ चुके हैं और अब ये विवादस्पद बयान, जनाब एक बार सोच तो लिया होता की कहाँ ये बयान दे रहे हैं भारत जहाँ पर २९ फीसदी से ऊपर गरीबी है, और कई लोगों को हवाई जहाज तो क्या एक बार का खाना भी नसीब नही होता

लगता है मंत्रीजी ने शायद कभी मुंबई लोकल या डीटीसी और ब्लूलाइन के मुसाफिरों को नही देखा , में तो यही सोच रहा हूँ की अगर हवाई यात्री मवेशी हो सकते हैं तो इन्हे क्या कहा जाएगा, जो आधे गाड़ी अन्दर और आधे बाहर होकर सफर करते है

एक हमारे विदेशमंत्री हैं, जिनके ५ सितारा मिजाज़ कुछ ऐसे हैं,की कुछ निर्दोष पेडों को इसकी बलि चड़ना पड़ा , दरअसल मंत्री जी को अपने सरकारी बंगले पर एक आलिशान 'लॉन' बनवाना है, जिसकी कीमत बेचारे पेडों को चुकानी पड़ी

अब कौन इन महानुभावों को बताये की आपको आपके आराम और सुख के लिए नहीं बल्कि लोगों की सस्मास्याओं को देखने के लिए ये पद दिया गया है, कम से कम बयानबाजी से पहले एक बार तो इनकी भावनाओं की क़द्र कर लिया कीजिये, शायद फिर अंग्रेजों की तरह 'सॉरी' न कहना पड़े

मुझे शिकायत इनको मिलने वाली सुख सुविधाओं से नहीं है बल्कि में तो इतना चाहता हूँ इसका कुछ हिस्सा उन लोगों को भी तो मिले जिनकी वजह से ये लोग वह पर हैं

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