Friday, December 25, 2009

ये आग किसने लगाई...

सबको अलग राज्य चाहिए, मानो राज्य न होकर पिज्जा और बर्गर हो गया, की आर्डर दिया और तुरंत पाया मुझे तो ऐसा ही नज़र आ रहा है, स्कूल में पड़ा था की 'अनेकता में एकता भारत की विशेषता', आज तक इस विरोधाभास को सत्य मानता था लेकिन अब कुछ स्वार्थियों की कुमंषा इसको परिवर्तित करने के विचार में है


चंद्रशेखर राव को तेलंगाना चाहिए, तो मायावती उत्तरप्रदेश के और टुकड़े करवाना चाहती है, मध्यप्रदेश महाकौशल मांग रहा है तो विदर्भ और गोरखालैंड की भी 'फुल-डिमांड' है कहीं भूख हड़ताल चल रही है तो कहीं कर्फ्यू लगा है और तोड़फोड़ चल रही है, हालात कुछ यूँ हैं की हर एक बयान पर प्रतिकियाएं आ रही हैं


मुख्यरूप से जो मांग परेशानी का सबब बनी हुई है वो आँध्रप्रदेश में तेलंगाना की है, तेलंगाना राष्ट्र समिति की अध्यक्ष चंद्रशेखर राव इसको लेकर आक्रामक रुख की बात कह रहे हैं जबकि केंद्र अपने बयानों पर लगातार पलती मार रहा है , हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं की राष्ट्रपति शाशन तक की बात हो रही है ,क्योंकि आन्ध्र प्रदेश विधानसभा के १०० से अधिक विधायक अपने इस्तीफे सौंप चुके हैं

और इस पूरे राजनीतिक धारावाहिक में बिना वजह पिसते जा रहे हैं आम लोग
संविधान भाषा के आधार पर राज्य-विभाजन की बात तो कहता है लेकिन ये तो हमें सोचना होगा की इसकी सीमा क्या हो,कब तक देश को टुकड़ों -टुकड़ों में बांटते रहेंगे, और कब तक अपनी मांगे मनवाने के लिए असामाजिक कृत्यों का सहारा लेते रहेंगे

Saturday, December 19, 2009

आडवाणी को वनवास,सुषमा को राज


कुछ दिनों पहले तक क्रिकेट में युवाओं को तरजीह देने की बात कही जा रही थी,कहते थे ये यंगिस्तान का समय है, उन्हें मौका दो, बुजुर्ग बहुत खेल चुके अब कुछ यही हाल राजनीति में भी चल रहा है भाजपा के तो यही हाल हैं, लगता है उनका भरोसा भी अब बुजुर्ग नेताओं से उठने लगा है,इसी का तो परिणाम है की भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में बहु-प्रतीक्षित परिवर्तन हो गया
लोक-सभा चुनावों में हार के बाद से भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाये जा रहे थे , पार्टी की धज्जियां उड़ाने से खुद पार्टी के नेता भी नहीं बच पाए, बार-बार नेतृत्व परिवर्तन की बात कह कर लालकृष्ण आडवाणी और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह पर उंगलियाँ उठाई जा रही थी
आखिरकार आज वो दिन भी आ गया जब मन में प्रधानमंत्री बनने का अधूरा ख्वाब लिए आडवाणी ने लोक-सभा में नेता -प्रतिपक्ष का पद भी छोड़ दिया यूँ तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है, लेकिन इस तरह जाना होगा , ये शायद किसी को गंवारा न होगा अब ये पद सुषमा स्वराज संभालेंगी , कैसे और कब तक? ये देखना दिलचस्प होगा
इस परिवर्तन के साथ एक और परिवर्तन भी पार्टी नेतृत्व में हुआ, राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के स्थान नितिन गडकरी को ये जिम्मेदारी सौंपी गयी,गडकरी महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष हैं
कुछ इसे संघ की करामात कहता है, तो कोई इसे भाजपा के उज्जवल भविष्य के लिए जरूरी कदम बताता है, जो भी हो लेकिन ये परिवर्तन कहीं न कही वक़्त भी मांग रही दूसरी पीड़ी को नेतृत्व सौंपना एक सकारात्मक कदम ही कहा जा सकता है
हालांकि आडवाणी ने अभी सक्रिय राजनीति में रहने की बात कही है, लेकिन कब तक, ये तो वही जानें , फिलहाल उन्हें भाजपा संसदीय दल का नेता नियुक्त किया गया है
उम्मीद है ये परिवर्तन भाजपा का भला ही करें